कॉन्फ्रेंस में देशभर के शोधकर्ताओं ने लिया हिस्सा
राष्ट्रीय फलक पर जबलपुर का गौरव: इंजीनियर संतोष मिश्र ने रामायण कालीन नारी शक्ति पर प्रस्तुत किया शोध पत्र, दिल्ली में हुए सम्मानित
जबलपुर| देश की राजधानी में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों से कुल 89 शोध पत्र चयनित किए गए थे। इस गरिमामय अवसर पर मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता और रामायण केंद्र जबलपुर के संयोजक इंजीनियर संतोष कुमार मिश्र ने अपना व्याख्यान दिया। उनके शोध का केंद्र बिंदु 'रामायण काल में सशक्त नारी' रहा।
नारीत्व और नैतिक मूल्य: भारतीय संस्कृति के आभूषण
इंजीनियर मिश्र ने अपने शोध के माध्यम से यह प्रतिपादित किया कि रामायण काल में नारी की वास्तविक शक्ति केवल बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि उसके आंतरिक गुणों में समाहित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
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वास्तविक आभूषण: धैर्य, लज्जा, क्षमा, श्रद्धा, करुणा और त्याग ही भारतीय संस्कृति में नारी के सच्चे आभूषण हैं।
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मानसिक संकल्प: रामायण काल की महिलाएं स्वभाव से भले ही कोमल थीं, लेकिन उनका मानसिक संकल्प और इच्छाशक्ति पुरुषों से कहीं अधिक सुदृढ़ और प्रभावशाली थी।
पाश्चात्य अंधानुकरण बनाम भारतीय परंपरा
अपने संबोधन में उन्होंने आधुनिक दौर में नारी सशक्तिकरण के नाम पर अपनाई जा रही पाश्चात्य पद्धति पर गहरी चिंता व्यक्त की।
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सांस्कृतिक चुनौतियां: सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से भारतीय मूल्यों को प्रभावित करने के प्रयासों को उन्होंने एक बड़ी चुनौती बताया।
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दार्शनिक दृष्टिकोण: श्रीरामचरितमानस को एक गूढ़ आध्यात्मिक ग्रंथ बताते हुए उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा नारी के संदर्भ में लिखे गए प्रसंगों को ईश्वर की 'माया रूपी प्रकृति' के संकेत के रूप में समझना चाहिए। उनके अनुसार, दर्शनशास्त्र की दृष्टि से प्रकृति की समस्त संरचनाएं नारी वर्ग का ही प्रतिनिधित्व करती हैं।
सांसद कमलजीत सेहरावत ने किया सम्मान
इंजीनियर मिश्र के गहन विश्लेषण और शोध की सराहना करते हुए पश्चिमी दिल्ली की सांसद श्रीमती कमलजीत सेहरावत ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। शोध पत्र में यह रेखांकित किया गया कि रामायण काल के समाज में महिलाओं का स्थान अत्यंत विशिष्ट था और उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक सम्मान और शक्तियां प्राप्त थीं।
विद्वानों ने सराहा आध्यात्मिक दृष्टिकोण
कार्यक्रम में उपस्थित देश भर के विद्वानों ने संतोष कुमार मिश्र द्वारा प्रस्तुत गूढ़ रहस्यों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह शोध पत्र न केवल प्राचीन भारतीय जीवन मूल्यों को उजागर करता है, बल्कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में उनकी प्रासंगिकता और महत्व को भी सिद्ध करता है। इस उपलब्धि पर जबलपुर के शैक्षणिक और सांस्कृतिक हलकों में हर्ष व्याप्त है।

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