लखनऊ की भूलभुलैया जहां से निकलना है मुश्किल
लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ अपनी विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर नवाबों की नगरी के रूप में भी जाना जाता है। शहर की प्रमुख पर्यटन स्थली में से एक है इमामबाड़ा जिसका निर्माण नवाब असफ़-उद-दौला ने 1784 में करवाया था। नवाब मसूद अब्दुल्लाह शीश महल के रॉयल फैमिली से है और अवध के तीसरे बादशाह के वंशज हैं।
उन्होंने इमामबाड़ा से जुड़े रोचक इतिहास के बारे में बताया कि जब 1784 में अवध में अकाल पड़ गया था और लोग भूखे मरने लगे थे। इस संकट के समय नवाब असफ-उद-दौला ने लोगों को रोजगार प्रदान करने के लिए इमामबाड़ा का निर्माण करवाया था। नवाब मसूद बताते हैं कि जब अवध में 1784 में अकाल पड़ गया था तो लखनऊ के नवाब ने लोगों को रोजगार देने के लिए इमामबाड़ा बनवाया था। सुबह मजदूर इमारत बनाते थे रात को इसे तोड़ दिया जाता था। यह सिलसिला 11 सालों तक चला अंत में राज्य में जब अकाल खत्म हुआ तो इमामबाड़ा बनकर तैयार हुआ। मसूद अब्दुल्ला में बताया कि इमामबाड़े के अंदर बने भूलभुलैया की खूबी यह है कि पूरे इमारत के निर्माण में लोहा और लकड़ी का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसके अलावा, इमामबाड़ा में हजारों दरवाजे हैं जो एक जैसे दिखते हैं। लखनऊ में इसे भूलभुलैया भी कहां जाता है। एक तरह के कई दरवाजे होने के कारण लोग असमंजस की स्थिति में आ जाते हैं कि कहां से आया था और कहां निकलना है। इमामबाड़े में घूमने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। यहां उन्हें धार्मिक और लखनऊ की सांस्कृतिक का अनुभव मिलता है। इमामबाड़े की शानदार वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व इन यात्रियों को आकर्षित करती है।

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