सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के खुरई शहर से बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) के साथ दफ्तर में घुसकर मारपीट किए जाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक महिला और उसके साथियों द्वारा जेई की चप्पलों और थप्पड़ों से पिटाई करने का यह पूरा घटनाक्रम वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। इस घटना पर पुलिस द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद अब स्थानीय अधिवक्ता (वकील) लामबंद होकर सड़कों पर उतर आए हैं और दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

दफ्तर में घुसकर की गई थी जूनियर इंजीनियर की पिटाई

यह पूरा विवाद खुरई शहरी थाना क्षेत्र का है, जहां बिजली विभाग के कार्यालय में पदस्थ जूनियर इंजीनियर कैलाश बेलदार के साथ उनके केबिन में मारपीट की गई। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए एक महिला समेत चार नामजद आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट का मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों में स्थानीय अधिवक्ता संतोष सिंह का नाम भी शामिल है। इसके विरोध में सोमवार (8 जून) को वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया और पुलिस अधीक्षक (SP) के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर इस एफआईआर को पूरी तरह झूठा बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की।

स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध से शुरू हुआ था पूरा विवाद

अधिवक्ता संघ का आरोप है कि शहर की आवास कॉलोनी में रहने वाली महिला मेवा लोधी ने जब अपने घर पर जबरन 'स्मार्ट मीटर' लगाए जाने का विरोध किया, तो बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उनके साथ बदसलूकी की। इतना ही नहीं, महिला को परेशान करने के लिए उन पर बिजली चोरी का झूठा केस भी थोप दिया गया। वकीलों के मुताबिक, जब पीड़ित महिला इसी सिलसिले में जवाब-सवाल करने जूनियर इंजीनियर के दफ्तर पहुंची, तो जेई ने उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया। वकीलों का साफ कहना है कि प्रशासन द्वारा जनता पर जबरन स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि उपभोक्ता की सहमति के बाद ही मीटर लगाए जाने चाहिए।

बिजली विभाग का कोई भी केस नहीं लड़ेंगे वकील

बार एसोसिएशन ने पुलिस और प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि वकीलों और महिला के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर वापस नहीं ली जाती है, तो वे आने वाले दिनों में अदालती कामकाज ठप कर उग्र आंदोलन करेंगे। इसके साथ ही वकील संघ ने यह बड़ा फैसला भी लिया है कि भविष्य में कोई भी वकील न्यायालय में विद्युत विभाग की तरफ से कोई मुकदमा नहीं लड़ेगा। फिलहाल इस विवाद के बाद शहर में बिजली विभाग के कर्मचारियों और वकीलों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।