बड़वानी: जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र एमजी रोड पर सीवरेज निर्माण कार्य में बरती जा रही घोर लापरवाही आज सुबह बड़े हादसे का कारण बनते-बनते रह गई। बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे निर्माण कार्य के चलते धंसी सड़क में सब्जी के टेंपो और बोतलों से लदी पिकअप सहित करीब 7-8 वाहन एक के बाद एक फंस गए। आलम यह था कि कुछ वाहनों के पहिए पूरी तरह गहरे गड्ढों में समा गए, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

नल की लाइन फूटने से सड़क बनी 'कीचड़ का दलदल'

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह जब जलापूर्ति के लिए नल खुले, तो सीवरेज के लिए खोदी गई मेन लाइन में पानी भर गया। निर्माण कंपनी द्वारा गड्ढों को केवल कच्ची मिट्टी से भरकर छोड़ दिया गया था, जो पानी के संपर्क में आते ही गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गई। इस दौरान वहां से गुजर रहे लोडिंग वाहन एक-एक कर धंसते चले गए। इस घटना के कारण एमजी रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। स्थानीय नागरिकों की मदद से कुछ वाहनों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक तीन वाहन अब भी फंसे हुए थे।

जनप्रतिनिधियों का फूटा गुस्सा: आश्वासन के बाद भी नहीं पहुँचे कर्मचारी

घटनास्थल पर पहुँचे वार्ड-6 के पार्षद सचिन शर्मा ने नगर पालिका और सीवरेज कंपनी के इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया, "मैंने रात में ही इंजीनियर को फोन कर रणजीत चौक पर गड्ढे भरवाने का आग्रह किया था। आश्वासन मिलने के बाद भी सुबह तक कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा। कंपनी रात में काम करके निकल जाती है और दिन भर जनता को मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं।" पार्षद ने आरोप लगाया कि मेन लाइन को क्षति पहुँचाने के कारण पानी का भराव हुआ और यह संकट खड़ा हुआ।

15 दिनों से खुदी सड़क, ठप पड़ा व्यापार

व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग की हालत पिछले 15 दिनों से दयनीय बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कंपनी ने दो दिन में काम पूरा करने का वादा किया था, लेकिन आधा महीना बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है। सड़क खुदी होने के कारण प्रतिदिन लगने वाले जाम से ग्राहक बाजार नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जिम्मेदारों की चुप्पी और लापरवाही पर नाराजगी

विधायक प्रतिनिधि विष्णु बनडे ने भी निर्माण कंपनी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शहर के मुख्य हृदय स्थल पर इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त से बाहर है। उन्होंने बताया कि कंपनी के कर्मचारी केवल मिट्टी डालकर इतिश्री कर लेते हैं, और जब संकट आता है तो कोई भी जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठाता। खुले चैंबर और कच्चे गड्ढे हर समय बड़े हादसों को न्योता दे रहे हैं।

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्माण कार्य को तत्काल गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए विवश होंगे।