ट्राईडेंट ग्रुप बनाम पंजाब सरकार: राजनीतिक पाला बदलते ही प्रदूषण बोर्ड की दबिश, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

चंडीगढ़। देश के बड़े औद्योगिक समूहों में शुमार ट्राईडेंट ग्रुप और पंजाब सरकार के बीच कानूनी जंग छिड़ गई है। कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि राजिंदर गुप्ता के राजनीतिक दल बदलने के ठीक बाद सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

याचिका में कहा गया है कि समूह के संस्थापक राजिंदर गुप्ता ने 24 अप्रैल को अपना राजनीतिक पाला बदला था। इसके तुरंत बाद से ही कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों को कथित तौर पर धमकियां मिलने लगीं।

  • दबिश की शैली: कंपनी का आरोप है कि गुरुवार रात करीब 7:30 बजे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 30 सदस्यीय टीम ने 'छापेमारी' के अंदाज में फैक्टरी परिसर में प्रवेश किया।

  • नियमों की अनदेखी: याचिका के अनुसार, टीम ने नमूने लेते समय वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नियमों के मुताबिक नमूनों की एक प्रति उद्योग को नहीं सौंपी।


हाईकोर्ट का रुख और बोर्ड की सफाई

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं:

  • बोर्ड का आश्वासन: PPCB ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि 4 मई तक कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक या कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक नियमित निरीक्षण था और याचिका में जताई गई आशंकाएं निराधार हैं।

  • केंद्रीय जांच की मांग: कंपनी ने अदालत से आग्रह किया है कि लिए गए नमूनों की जांच पंजाब से बाहर किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए, क्योंकि उन्हें राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा नहीं है।

15 हजार कर्मचारियों का भविष्य दांव पर

अदालत को बताया गया कि 1990 में स्थापित यह समूह पूरी तरह सूचीबद्ध (Listed) है और यहाँ लगभग 15,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी का दावा है कि वे हमेशा से सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करते आए हैं और वर्तमान कार्रवाई केवल राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।


अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि उद्योग द्वारा जताई गई आशंकाएं तथ्यों के आधार पर सही पाई जाती हैं, तो प्रशासनिक निष्पक्षता और जांच की प्रक्रिया दोनों की न्यायिक समीक्षा की जाएगी।