जयपुर। राजस्थान इस बार गर्मियों में संभावित जल संकट से निपटने की तैयारी में जुट गया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने राज्यभर में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर आपातकालीन योजना (कंटीजेंसी प्लान) लागू की है। इसके तहत 210 करोड़ रुपये से अधिक के आपातकालीन कार्यों और 105 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैंकर आपूर्ति को मंजूरी दी गई है। राज्य में फिलहाल 315 शहरी निकाय और 43 हजार से अधिक गांव पेयजल योजनाओं से जुड़े हैं, लेकिन सप्लाई की नियमितता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। केवल करीब 110 शहरों में रोजाना 24 घंटे के भीतर पानी की आपूर्ति हो रही है, जबकि कई शहरों में 48 से 96 घंटे के अंतराल पर पानी मिल रहा है। ग्रामीण इलाकों में आज भी भूजल और सतही स्रोतों पर भारी निर्भरता बनी हुई है।

आपात कार्यों पर फोकस

विभाग ने गर्मियों के संकट को देखते हुए नए ट्यूबवेल, पुराने स्रोतों की गहराई बढ़ाने, पाइपलाइन बिछाने और बदलने, पंप सेट की मरम्मत व स्थापना जैसे कार्य तेज कर दिए हैं। साथ ही पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों में टैंकर से सप्लाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अधूरी तैयारियां भी चिंता का कारण

राज्य में 96% हैंडपंप और 80% ट्यूबवेल चालू कर दिए गए हैं, जबकि बाकी काम 15 अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि फलोदी, जयपुर, भरतपुर, कोटा और सवाई माधोपुर में हैंडपंप कार्य धीमा है। वहीं चित्तौड़गढ़, झालावाड़, करौली, प्रतापगढ़ और सवाई माधोपुर में ट्यूबवेल कार्य भी पीछे चल रहे हैं।

बिजली कनेक्शन बना बड़ा अड़चन

जल आपूर्ति से जुड़े कई प्रोजेक्ट बिजली कनेक्शन के अभाव में अटके हुए हैं। जयपुर, जोधपुर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़ और सीकर में बड़ी संख्या में कनेक्शन लंबित हैं, जिससे गर्मियों में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

इंदिरा गांधी नहर बंदी से 2.1 करोड़ लोग प्रभावित

सबसे बड़ी चुनौती इंदिरा गांधी नहर प्रणाली की प्रस्तावित नहरबंदी (30 मार्च से 13 मई 2026) है। इससे बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और श्रीगंगानगर सहित 13 जिलों के करीब 2.1 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। इस दौरान जलाशयों में भंडारण, टैंकर सप्लाई और स्थानीय स्रोतों पर निर्भरता बढ़ेगी। कुछ प्रमुख जलाशयों में केवल 5 से 20 दिन का पानी बचा है। ऐसे में नहर बंदी से पहले सभी जलाशयों को अधिकतम स्तर तक भरने के निर्देश दिए गए हैं।

निगरानी और नियंत्र कक्ष सक्रिय

स्थिति पर नजर रखने के लिए 1 अप्रैल से रोजाना समीक्षा बैठकें शुरू कर दी गई हैं। राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और हेल्पलाइन 181 पर आने वाली शिकायतों की मॉनिटरिंग की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड विजिट कर रहे हैं।

हैंडपंप सुधार अभियान भी शुरू

राज्य में 1 अप्रैल से 50वां हैंडपंप मरम्मत अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत हजारों खराब हैंडपंपों को ठीक किया जाएगा। साथ ही जल जीवन मिशन की योजनाओं के रखरखाव और आपात कार्यों के लिए जिलों को अतिरिक्त फंड भी जारी किए गए हैं।