कहा—अगर हथियार उठाते तो संसद में नहीं, सरेंडर लिस्ट में होते
बांसवाड़ा। लोकसभा में नक्सलवाद मुक्त भारत पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बांसवाड़ा-डूंगरपुर के बीएपी सांसद राजकुमार रोत पर निशाना साधा। गृह मंत्री ने कहा कि अगर रोत ने लोकतांत्रिक रास्ते की बजाय हथियार उठाने का रास्ता चुना होता, तो वे संसद में नहीं, बल्कि सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर करने वालों की सूची में होते।
संविधान की वजह से संसद में बैठे रोत
सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस और बीएपी सांसद राजकुमार रोत पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत का संविधान अन्याय के खिलाफ लड़ने का पूरी तरह लोकतांत्रिक और स्पष्ट रास्ता देता है। इसी रास्ते पर चलकर राजकुमार रोत ने चुनाव लड़ा और आज संसद में अपनी बात रख पा रहे हैं। देश में कानून और संविधान का राज सही तरीके से लागू होने की वजह से ही यह संभव हो सका है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासियों के विकास के मुद्दे पर कांग्रेस को भी घेरा। उन्होंने कहा कि राजकुमार रोत जैसे युवा नेता वोट की राजनीति के कारण कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े हैं। अमित शाह ने सवाल उठाया कि 60 साल में से 50 साल कांग्रेस की सरकार रही, फिर आदिवासी समाज क्यों पिछड़ा रहा। आगे उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में दशकों तक आदिवासियों के बैंक खाते तक नहीं खोले गए। अब नरेंद्र मोदी सरकार ही आदिवासियों को पक्का घर, साफ पानी, बिजली, स्कूल और मोबाइल कनेक्टिविटी दे रही है।
हथियार उठाने वालों को कड़ी चेतावनी
गृह मंत्री अमित शाह ने हथियार लेकर आंदोलन करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अन्याय का समाधान संविधान के दायरे में ही है। अदालतें, विधानसभा और पंचायत से लेकर तहसील तक की व्यवस्था इसी के लिए है। व्यवस्था को नकारकर हथियार उठाना स्वीकार्य नहीं है। मोदी सरकार में जो भी हथियार उठाएगा, उसे अपने किए का हिसाब जरूर चुकाना पड़ेगा।

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