Bharatiya Janata Party ने सहयोगी दल को संयम बरतने की सलाह दी
महाराष्ट्र। मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत चलाए जा रहे 'ऑपरेशन तुतारी' पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) हाईकमान ने ब्रेक लगा दिया है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को यह अभियान आगे बढ़ाने के लिए बीजेपी की ओर से ‘रेड सिग्नल’ दिया गया है। बताया जा रहा है कि 'तुतारी' यानी शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद अगर महायुति में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के गुट के जरिए आना चाहिए. ऐसी सलाह बीजेपी आलाकमान ने एकनाथ शिंदे को दी है।
ठाकरे-पवार के 6-6 सांसद शिंदे के संपर्क में?
खबरों के मुताबिक, 'ऑपरेशन तुतारी' के तहत 6 सांसद (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के 6 सांसदों को अपने पक्ष में लाने की शिंदे की तैयारी थी. फिलहाल शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 7 सांसद हैं. अगर पवार गुट के 6 और ठाकरे गुट के 6 सांसद शिंदे के साथ आते हैं, तो कुल संख्या 19 हो सकती है।
इस रणनीति के पीछे क्या है उद्देश्य?
एकनाथ शिंदे ने इस ऑपरेशन के तहत 19 सांसदों के साथ राजनीतिक सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने की कोशिश की है. इससे शिंदे गुट लोकसभा चुनाव 2029 में कम से कम 19 सीटों पर दावा कर सकता है. हालांकि, बीजेपी की ओर से अभी इस रणनीति को ‘ग्रीन सिग्नल’ नहीं मिला है. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एकनाथ शिंदे से मुलाकात भी नहीं की।
उद्धव ठाकरे का साथ क्यों छोड़ सकते हैं सांसद?
कुछ संभावित कारणों के चलते शिवसेना यूबीटी के सांसद अपनी पार्टी से नाराज हो सकते हैं. ये कारण कुछ इस प्रकार हैं-
- अगले 5 वर्षों तक महायुति सरकार स्थिर रहने की संभावना है
- कई सांसद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं
- विकास कार्यों के लिए निधि प्राप्त करने में कठिनाई
- केंद्र और राज्य, दोनों जगह महायुति सरकार होने का लाभ
- पार्टी और चुनाव चिन्ह का मुद्दा सेकंडरी होता जा रहा है
- बीजेपी के साथ होने से विकास कार्यों और फंड में आसानी होगी

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