लड़कियों को क्यों नहीं छूने चाहिए हनुमान जी के पैर? जान लें पूर्वजों का तर्क कितना सही और गलत
हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और ब्रह्मचर्य का प्रतीक माना जाता है. पूरे देश में उनकी पूजा बहुत श्रद्धा के साथ की जाती है, खासकर मंगलवार और शनिवार को. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि महिलाओं को हनुमान जी के चरण क्यों नहीं छूने चाहिए. इस बात को लेकर समाज में कई धारणाएं प्रचलित हैं, इसलिए इसकी मान्यता को सही और आसान तरीके से समझना जरूरी है, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी आजीवन ब्रह्मचारी हैं. ब्रह्मचर्य का मतलब सिर्फ विवाह न करना नहीं होता, बल्कि मन, सोच और ऊर्जा पर पूरा नियंत्रण रखना भी होता है. शास्त्रों में माना गया है कि हनुमान जी की शक्ति और साधना की जड़ उनका कठोर ब्रह्मचर्य है. इसी वजह से परंपरा में यह माना गया कि महिलाएं उनके चरण स्पर्श न करें, ताकि उनके ब्रह्मचर्य और तपस्या की मर्यादा बनी रहे. यह नियम महिलाओं के सम्मान को कम करने के लिए नहीं, बल्कि हनुमान जी के आदर्शों का सम्मान करने के लिए माना जाता है.
इस मान्यता से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी सुनने को मिलती है. कहा जाता है कि एक बार एक महिला ने श्रद्धा भाव से हनुमान जी के चरण छू लिए. तब हनुमान जी ने बहुत ही विनम्रता से उसे ऐसा न करने के लिए कहा. उन्होंने समझाया कि उनका जीवन पूरी तरह राम भक्ति और ब्रह्मचर्य को समर्पित है. इसलिए उनकी पूजा में चरण स्पर्श की बजाय दूर से प्रणाम करना और मन से भक्ति करना अधिक उचित माना जाता है. इस कथा का उद्देश्य महिलाओं को रोकना नहीं, बल्कि पूजा की मर्यादा को समझाना है.
धार्मिक जानकारों के अनुसार, यह परंपरा पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों से भी जुड़ी हुई है. प्राचीन समय में पूजा-पाठ के नियम उस दौर की सोच और समाज की व्यवस्था के अनुसार बनाए जाते थे. आज के समय में कई विद्वान यह मानते हैं कि भक्ति का असली महत्व मन और भावना में होता है, न कि सिर्फ किसी शारीरिक क्रिया में. हनुमान जी खुद सेवा, करुणा और समर्पण के प्रतीक हैं, और उनकी भक्ति में स्त्री और पुरुष के बीच कोई भेद नहीं किया गया है.
ये हैं प्राचीन काल की सबसे खौफनाक सजाएं, जानकर कांप जाएगी रूह!

राशिफल 15 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन