मध्य प्रदेश में साइबर ठगों ने 5 साल में उड़ा दिए 1149 करोड़, रिकवरी में पुलिस को आ रहा पसीना
भोपाल: मध्य प्रदेश में साइबर अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं. पिछले 5 सालों में मध्य प्रदेश में साइबर अपराधी 1149 करोड़ की धोखाधड़ी कर चुके हैं. साल 2025 में अब तक जालसाज 298 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दे चुके हैं. साइबर फ्रॉड को लेकर 26 हजार से ज्यादा शिकायतें पुलिस के पास पहुंची, लेकिन इससे भी चिंताजनक यह है कि इनमें से चुनिंदा शिकायतकर्ताओं को ही अपनी रकम वापस मिल पाई है.
धोखाधड़ी की कुल रकम की 11 फीसदी हुई रिकवरी
मध्य प्रदेश में पिछले 5 सालों में 2 लाख 35 हजार से ज्यादा लोग साइबर अपराधों का शिकार हो चुके हैं. ये लोग डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, अकाउंट चोरी, सायबर बुलिंग जैसे कई तरह के साइबर अपराधों के शिकार हुए हैं. ऐसी वारदातें लोगों को आर्थिक नुकसान, तो पहुंचा ही रही हैं, साथ ही मानसिक रूप से भी परेशान कर रही हैं.
साइबर अपराधियों से निपटने में पुलिस को भी पसीना बहाना पड़ रहा है. अधिकांश मामलों में पुलिस ऐसे अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रही है. पिछले 5 सालों में वित्तीय धोखाधड़ी की 1 लाख 8 हजार से ज्यादा शिकायतें साइबर सेल के पास पहुंची. जालसाजों ने 1149 करोड़ रुपए ठगे, लेकिन इसमें से पुलिस मात्र करीब 100 करोड़ रुपए की ही रिकवरी कर पाई.
1 लाख 27 हजार लोग साइबर अपराध के हो चुके शिकार
कुछ लोग आर्थिक नुकसान से तो बच गए, लेकिन उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. एमपी में पिछले 5 सालों में साइबर अपराध के 1 लाख 27 हजार मामले दर्ज किए गए. इसमें सबसे ज्यादा मामले देवास में सामने आए. जहां 1956 शिकायतें दर्ज की गई. देवास जैसे छोटे जिलों में अपराधी लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं. यह जानकारी कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने दी.
'ऐसे अपराधों को रोकने के लिए की गई है साइबर क्राइम सेल की स्थापना'
विधायक यादवेंद्र सिंह के मुताबिक, "साइबर अपराधी अब छोटे जिलों के लोगों को निशाना बना रहे हैं. जिस तरह से ऐसे अपराध बढ़ रहे हैं, उसके हिसाब से पुलिस के संसाधन अपर्याप्त हैं." मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखित जवाब में बताया कि साइबर अपराधों की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल की स्थापना की गई है. साइबर थाने में सभी प्रकार की शिकायतें प्राप्त होती हैं. ऐसे मामलों में दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाम, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड, पंजाब सहित कई राज्यों से अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है.

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