रेलवे में तकनीकी अपग्रेड: श्रीधाम–भदनपुर सेक्शन पर 2×25 केवी सिस्टम को हरी झंडी
भोपाल। भारतीय रेल ट्रैकों की क्षमता, ट्रेनों की गति एवं फ्रेट लोडिंग बढ़ाने के लिए अधोसरंचना कार्यों को गति प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिसके अंतर्गत भारतीय रेलवे द्वारा "मिशन 3000 मिलियन टन" एवं "मिशन रफ्तार" की जैसी योजनायें तैयार की जा रही है। इन योजनाओं को सुनिश्चित करने के किये भारतीय रेलवे ने एक नया 2x25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम शुरू किया गया है, जो पारंपरिक ओवरहेड उपकरणों की जगह लेगा। इस परियोजना का उद्देश्य ट्रेन की गति बढ़ाना और ऊर्जा की हानि को कम करना है, जो कि संतुलित संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केन्द्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी ने कहा कि जबलपुर से कटनी रेलवे का व्यस्त सेक्शन है। ज्यादा गाड़ी चलाने के लिए इलेक्ट्रिक ट्रेक्शन सिस्टम को 2×25 केवी लेवल पर अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है। इससे मुंबई-प्रयागराज ट्रंक रूट पर अधिक गाड़ियां चलाई जा सकेंगी। अगले तीन वर्षों में 437 करोड़ रुपए के निवेश से यह सेक्शन अपग्रेड हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम एक रेलवे विद्युतीकरण प्रणाली है जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक ट्रेनों के लिए किया जाता है। इसमें, ट्रैक्शन सब-स्टेशन 50 केवी पर बिजली की आपूर्ति करता है, और इसे ऑटो-ट्रांसफार्मर (AT) का उपयोग करके 25 केवी पर परिवर्तित किया जाता है। यह प्रणाली अधिक कुशल होती है और पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में वोल्टेज ड्रॉप कम करती है। इस परियोजना के मंजूरी मिलने से भारतीय रेलवे के "मिशन 3000 मिलियन टन" और "मिशन रफ्तार" को गति मिलेगी, साथ ही रेलवे सेक्शन की क्षमता बढ़ेगी एंव ट्रेनें तेज गति (160 केएमपीएच) से चलाई जा सकेगी। पश्चिम मध्य रेल में कोटा-नागदा सेक्शन, इटारसी-भोपाल-बीना सेक्शन, इटारसी-श्रीधाम एवं भदनपुर-मानिकपुर सेक्शन को पहले से ही 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम की मंजूरी मिली हुई है। इस तरह अब श्रीधाम-भदनपुर रेलखंड को मंजूरी मिलने से इटारसी से मानिकपुर तक सम्पूर्ण सेक्शन 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम का हो जायेगा। पश्चिम मध्य रेल के श्रीधाम-भदनपुर रेलखंड (192 मार्ग किमी/430 टीकेएम) के लिए रुपये 437 करोड़ 58 लाख की लागत से "1x25 केवी से 2x25 केवी कर्षण प्रणाली में विद्युत कर्षण प्रणाली के उन्नयन" प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। इस प्रणाली का फायदा मुंबई-प्रयागराज ट्रंक रूट को मिलेगा जिस पर अधिक गाड़ियां तेज गति से चलाई जा सकेंगी।

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